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इंटरनेट पर हिंदी के नए तकनीकी योद्धा नॉटनल, मसाला चाय और मार्कमाईबुक



वेब रिपोर्टर : केंद्रीय हिन्दी संस्थान तथा विश्व हिन्दी सचिवालय के तत्वावधान में वैश्विक हिन्दी परिवार द्वारा हिंदी प्रौद्योगिकी – प्रयोग और संभावनाएं विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में वक्ता के रूप में नॉटनल डॉट के संस्थापक नीलाभ श्रीवास्तव, मसाला चाय यूट्यूब चैनल की संचालक सुदीप्ता सिन्हा, मार्कमाईबुक डॉट कॉम के सह संस्थापक मनीष धारीवाल, रेवेरी लैंग्वेज टेक्नोलॉजी के सह संस्थापक विवेकानंद पाणि उपस्थित थे। कार्यक्रम में सानिध्य वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव, समाहार वरिष्ठ लेखक और केंद्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा ‘जोशी’ ने किया। कार्यक्रम का विषय प्रवेश एवं संयोजन डॉ. राजेश कुमार ने किया। अतिथि वक्ताओं का स्वागत डॉ. केशरीनंदन ने किया। गोष्ठी का संचालन प्रसिद्द तकनीकविद अनूप भार्गव ने किया।

    गोष्ठी में अपने अनुभव एवं चुनौतियों को साझा करते हुए नीलाभ श्रीवास्तव ने कहा कि कोरोनाकाल में मुद्रित पुस्तकों एवं पत्रिकाओं से अलग ई-बुक एवं ई-पत्रिकाओं का चलन एवं प्रसार बढ़ा है और इस क्षेत्र में अनेक चुनौतियों के बावजूद संभावनाएं बहुत हैं। उन्होंने कहा कि वे हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं की पत्रिकाओं का ई-संस्करण एवं किताबों की डिजिटल प्रति मुद्रित प्रतियों से कम कीमत पर अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराते हैं। मसाला चाय यूट्यूब चैनल की संचालिका सुदीप्ता सिन्हा ने कहा कि उन्हें हिंदी की खराब हालत देखकर बहुत दुख होता है और तब जब खासकर लोग कुछ गलत हो जाने पर कहते हैं कि ‘अरे इसने तो इस काम की हिंदी कर दी’- मैं ऐसे कटाक्षों की चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी भाषा के सम्मान के लिए काम कर रही हूँ। इस अवसर पर मनीष धारीवाल ने कहा कि वे लेखकों, प्रकाशकों, अनुवादकों, पाठकों को अपनी वेबसाइट के माध्यम से उनके काम, संदेशों, प्रतिक्रियाओं को दुनियाभर के पाठकों तक पहुंचाने के लिए बहुत कम कीमत में मंच उपस्थित कराते हैं। विवेकानंद पाणि ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब पूरा समाज अंग्रेजी पढ़ने में गर्व अनुभव करता था तो मैंने सी-डैक में पहले अपनी मातृभाषा को कंप्यूटर पर सक्षम करने हेतु अपने तकनीकी ज्ञान को उपयोग करने का लक्ष्य बनाया। वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने सभी वक्ताओं के काम की सराहना करते हुए कहा कि ये लोग निश्चित ही साधुवाद के पात्र हैं। इन लोगों ने सरकारी सहायताओं के न होते हुए भी अपनी हिंदी एवं अपनी भाषाओं के संवर्धन हेतु गंभीर प्रयास किए हैं और निश्चित ही ‘भाषा भारत’ जैसे प्रयासों से देश में हिंदी की स्थिति में सुधार होगा।

    कार्यक्रम का समाहार करते वरिष्ठ लेखक और केन्द्रीय हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष अनिल शर्मा ‘जोशी’ ने अपने यहां से प्रकाशित पत्रिकाओं के विषय में जानकारी दी और कहा कि हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि प​त्रिकाएं समाज के अधिकांश वर्ग तक कैसे पहुंचे। पत्रिका निकालना, प्रकाशित होना ही उद्देश्य नहीं है किंतु उसका प्रयोक्ता वर्ग कौन होगा, इस बिंदु पर हमें अपनी सोच, दृष्टि, दिशा को तराशना होगा। अपनी अपनी भाषाओं की सामग्री को कैसे इंटरनेट पर पहुंचाएं और इसमें देश की मेधा का उपयोग कैसे किया जाए, यह विचारणीय है। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने समाज के बहुत बड़े वर्ग को भाषा एवं तकनीक से जोड़ना होगा और यह व्यावहारिक धरातल पर होना चाहिए न कि हमें किसी मिथक में जीना चाहिए। कार्यक्रम में पद्मश्री मिजोकामी जी, प्रो. वी आर जगन्नाथन आदि प्रमुख लोगों ने भी अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में आभार संध्या सिंह ने व्यक्त किया। 

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