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यूनानी वर्णमाला में क्यों गुंथा है उत्तर प्रदेश का यह नगर


जिले
का नाम गौतमबुद्ध नगर। सांस्कृतिक इतिहास की जड़ें रामायण काल तक जाती हैं। यहां रावण का गांव स्थित होना माना जाता है। दो गांव ऐसे हैं जो क्रांतिकारी भगत सिंह और रामप्रसाद बिस्मिल की स्मृतियों को सहेजते हैं। लेकिन यहां जो शहर बसाया गया उसे आधुनिक रंग देने के लिए मुहल्लों (सेक्टर) का नाम ग्रीक अल्फाबेट को समर्पित कर दिया गया। अल्फा से ओमेगा तक यूनानी वर्णमाला के 24 अक्षर ​इस शहर को आधुनिक कैसे बना रहे हैं, इसे समझना थोड़ा मुश्किल है लेकिन यह समझा जा सकता है इन नामों से यहां के मूल निवासियों की जमीन उनके लिए अपरिचित हो गई है। 

293 गांवों की भूमि ग्रेनो प्राधिकरण के दायरे में 
1991 में पहली बार वर्तमान ग्रेटर नोएडा के 101 गांवों के किसानों की जमीन को अधिगृहीत कर नया बसाने की शुरुआत की गई। 1992 में इस शहर का पहला मास्टर प्लान—2011 में तैयार हुआ। गांवों और किसानों की भूमि के अधिग्रहण का सिलसिला अब तक जारी है। अब तक 293 गांवों की भूमि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के दायरे में आ चुकी है। 1997 से पहले यह क्षेत्र ग़ाजियाबाद और बुलंदशहर जिले का हिस्सा हुआ करता था। 

अल्फ़ा, बीटा और गामा हैं सबसे पुराने सेक्टर
ग्रेटर नोएडा जब आकार लेने लगा तो यहां सेक्टरों के नाम ग्रीक अल्फ़ाबेट के नामों पर रखे जाने लगे। अल्फ़ा, बीटा और गामा यहां सबसे पुराने सेक्टर हैं। गौर करने वाली बात यह है कि आज ग्रेटर नोएडा इं​डस्ट्रियल डेवपलमेंट अथॉरिटी का दफ़्तर जिस गामा—2 सेक्टर में स्थित है वह ठीक रामपुर जागीर गांव के सामने बना है जहां 1919 में राम प्रसाद बिस्मिल मैनपुरी की घटना के बाद छिपकर रहे थे। 2018 में सेक्टर गामा—2 को आधिकारिक रूप से शहर की हृदय स्थली घोषित किया गया था। 



क्या है परी चौक का राज़
ग्रेटर नोएडा का परी चौक भी उसी सोच की कहानी बयां करता है जिसके तहत सेक्टरों के नाम यूनानी वर्णमाला के अल्फा, बीटा, गामा के नाम पर रखे गए। इब्राहीमी भाषा—संस्कृति में ढेर सारी परी कथाएं हैं। भारतीय भाषाओं में पंचतंत्र, जातक कथाएं, पौराणिक कहानियां, विक्रम बेताल की क​हानियां तो हैं, लेकिन परियों की कहानियां मौलिक रूप से शायद नहीं हैं। 

प्राचीन यूनान का नगर लगता है
तीन दशक में ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों के नाम — अल्फ़ा, बीटा, गामा, चाई, पाई, थीटा, ओमीक्रॉन आदि स्थानीय लोगों की जुबां पर मजबूरी से चढ़ सके हैं। परी चौक पर इन सेक्टरों के लिए आवाज लगाते आटो, बस चालक हों या उनमें बैठने वाली सवारियां एकबारगी उन्होंने समझ नहीं आता कि वे भारत के किसी आधुनिक शहर में हैं या प्राचीन यूनान के नगर एथेंस में

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