वेब रिपोर्टर :
देश की सभी प्रमुख भाषाओं में धार्मिक साहित्य का प्रकाशन करने वाले संस्थान गीता प्रेस के बंद होने के झूठे संदेश भी लगभग हर भाषा में प्रसारित हो रहे हैं। वॉट्सएप पर इस वर्ष फिर से यह संदेश तेजी से भ्रमण कर रहा है। आखिर क्या कारण है कि गीता प्रेस की बंदी का यह संदेश वाट्सएप पर अब तक 'फॉरवर्ड' होने का हकदार बना हुआ है। ऐसा संदेश पहली बार साल 2016 में वॉट्सएप के माध्यम से लोगों तक पहुंचा था।

1923 में गोरखपुर में स्थापित गीता प्रेस हिंदू धार्मिक साहित्य छापने वाला दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाशक है। यहां प्रकाशित हुई पुस्तकों की संख्या के लिहाज से गिनीज़ बुक आफ वल्र्ड रिकॉड्र्स में गीता प्रेस का नाम दर्ज है। साल 2016 में पहली बार वॉट्सएप के माध्यम से लोगों के बीच यह संदेश फैलाया गया कि गीता प्रेस आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है और इस पर जल्द ही ताला लग जाएगा। गौरतलब है कि गीता प्रेस देश की सभी प्रमुख भाषाओं में धार्मिक साहित्य बेहद सस्ते दाम पर उपलब्ध कराता है। पुस्तकों का मूल्य कम होने के चलते एकबारगी संदेश पढ़ने वाला सहज रूप से इस पर विश्वास कर लेता है। यही कारण है कि एक बड़े प्रकाशन के प्रति संवेदना रखने वाले लोग इस संदेश को आगे बढ़ाने से भी नहीं चूकते। वॉट्सएप के इस संदेश में यह अपील भी होती है कि इसे 20 लोगों को अग्रेषित करें। वॉट्सएप पर हर भारतीय, भारतीयेतर भाषा में यह संदेश संभवत: इसलिए लिखा जा रहा है क्योंकि गीता प्रेस की पुस्तकों के चाहने वाले प्राय: हर भाषा में हैं।


वॉट्सएप संदेश का स्क्रीनशॉट

गीता प्रेस के प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि यह संदेश पांच वर्ष से वॉट्सएप पर फैलाया जा रहा है। निश्चित रूप से गीता प्रेस के प्रति सद्भावना रखने वाले लोग इसे पढ़कर चौंकते होंगे। सोशल मीडिया पर यह संदेश फैलाकर हो सकता है कि कुछ लोग पैसे भी मांगते हों। इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया​ कि हाल में ही जापान से करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की छपाई की आधुनिक मशीनें आई हैं। कम मूल्य पर पुस्तक विक्रय करके भी गीता प्रेस किसी आर्थिक संकट से नहीं गुजर रहा है। उन्होेंने कहा कि वॉट्सएप पर ऐसे संदेशों को फॉरवर्ड करने से बचें। 

3 Comments

  1. डॉक्टर लाल मणि तिवारी जी एक सहज व्यक्ति हैं।मेरी उनसे व्यक्तिगत मुलाकात है। उन्होंने इस तरह की आशंका को खारिज किया है बल्कि गीता प्रेस घूमने और देखने वाले भी इसको महसूस कर चुके होंगे, हमें ऐसे किसी अफवाह के चक्कर में नहीं आना चाहिए।

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  2. सनातन विरोधियों की बड़ी साजिश ...

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