एफआईआर दर्ज कराने के लिए अगर कभी थाने जाने की नौबत आ जाए तो पुलिस की भाषा आपको चक्कर में डाल देगी। यहां भाषा से मतलब — क्या, क्यों, कहां, कैसे वाले पुलिसिया सवालों से नहीं है, बल्कि उस भाषा से है जिसमें पुलिस आपकी शिकायत दर्ज करती है। पुलिस थानों में दशकों से चली आ रही एफआईआर की इस भाषा में 383 ऐसे शब्दों की पहचान की गई है जो आम आदमी की समझ से परे हैं। दिल्ली पुलिस ने बाकायदा एक सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए कि शिकायत दर्ज करने में इन शब्दों का इस्तेमाल न किया जाए। 

अदम शनाख्त, अरसाल, इंसतगासा, इस्तहार-शोर-ए-गोगा, ततीमा, मुशतबहा, मुसम्मी, नज़्द, ना काबिले दस्तअंदजी, हस्ब मामूल, हस्ब मुफ्त साइल, जिमनी हज़ा, नअश, मुसम्मी, नक्शामर्म, इन्द्राज़, इन्सिदादे ज़राइम, काबिले दस्तंदाजी, मशकूक, बकुआ, समायात, हरबतलब, जाब्ता फौजदारी, बकार सरकार.....ये तो बस उस सूची के कुछ शब्द हैं जिनका इस्तेमाल पुलिस एफआईआर लिखने में करती आ रही है। इन शब्दों में पुलिस जब आम आदमी की शिकायत बुनती है तो कई बार मतलब बदल जाता है। अक्सर ऐसे किस्से सुनने में आते हैं कि पुलिस ने एफआईआर में फेरबदल कर दी, लेकिन कई बार चलन से बाहर हो चुके फारसी और उर्दू के शब्द ही मामले को उलझा देते हैं। 

कठिन शब्दों का इस्तेमाल रोकने को जनहित याचिका 
फ़ारसी से उर्दू में प्रचलित हुए 383 शब्दों में से अधिकतर ऐसे हैं जिनके अर्थ कई बार एफआईआर दर्ज करने वाले पुलिसकर्मी को भी नहीं मालूम होते हैं। प्राथमिकी की रटी-रटाई भाषा में मामला दर्ज तो हो जाता है लेकिन जब 'अनर्थ' सामने आता है तो आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो जाते हैं। एफआईआर की भाषा आम आदमी की समझ में आ सके, इसके लिए जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। 

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, सरल शब्दों का करें इस्तेमाल
एडवोकेट विशालाक्षी गोयल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिसंबर 2019 में दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस सी. हरिशंकर की बेंच ने स्पष्ट कहा था कि दिल्ली पुलिस आम बोलचाल में प्रयुक्त होने वाले फ़ारसी और उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल कर सकती है। लेकिन जिन 383 कठिन शब्दों की सूची अदालत के सामने रखी गई उनका इस्तेमाल करने की अनुमति अदालत ने नहीं दी। 

प्रचलन से बाहर हो चुके शब्दों के हिंदी और अंग्रेजी पर्याय सुझाए 
इस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को अवगत कराया था कि 20 नवंबर 2019 को दिल्ली पुलिस के कानूनी प्रकोष्ठ के उपायुक्त ने सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए थे कि 383 कठिन शब्दों के स्थान पर हिंदी या अंग्रेजी के सामान्य शब्दों का इस्तेमाल किया जाए। इस सर्कुलर में फ़ारसी-उर्दू के प्रचलन से बाहर हो चुके शब्दों के हिंदी और अंग्रेजी पर्याय भी सुझाए गए थे। 
दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट के अधिवक्ता विकास मिश्र कहते हैं कि आजकल थानों में कंप्यूटर पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। कंप्यूटर में प्राथमिकी की एक पूर्वनिर्धारित भाषा है जो पहले के मुकाबले काफ़ी हद तक सरल है। 

यदि आप सभी 383 शब्दों की सूची चाहते हैं तो हमें लिखें — news@prolingoeditors.com

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