जेएनयू से पीएचडी, डीयू के कॉलेज में कर रहे हैं अध्यापन


डॉ.
अनिरुद्ध कुमार देख नहीं सकते। लेकिन यह उनके लिए कोई दुश्वारी नहीं है। बिहार के नालंदा जिले के हिलसा से निकलकर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने तक हिंदी हमेशा उनके साथ रही। उन्होंने हिंदी से ही दुनिया देखी और दुनिया में हिंदी को देखना चाहते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर सेवाएं दे रहे डॉ. अनिरुद्ध आज भी खुद को हिंदी का छात्र मानते हैं। जेएनयू में पढ़ाई के दौरान उन्होंने हिंदी साहित्य और भाषा से जुड़े प्रामाणिक ज्ञान को इंटरनेट पर सर्वसुलभ बनाने की ठानी थी। बारह वर्षों से वह अपने इस 'मिशन' पर लगे हुए हैं। माध्यम है विकिपीडिया। 

2009 में इंटरनेट देश में नया तो नहीं था, लेकिन अपनी प्रारंभिक अवस्था में जरूर था। हर शहर, हर गली में साइबर कैफे थे। युवा पीढ़ी आरकुट से भली भांति परिचित थी। फेसबुक, ट्विटर धीरे—धीरे पैठ बना रहे थे। गूगल तब 'देवता' नहीं हुआ था। तब इन प्लेटफॉर्मों की विश्वसनीयता, प्रामाणिकता पर भरोसा नहीं जमा था। युवा फेसबुक पर अकाउंट बनाकर उसे आजमाने में लगे थे। इस समय तक विकिपीडिया हिंदी छह साल का हो चुका था। बाकी युवाओं के विपरीत अनिरुद्ध को आरकुट, फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉगर की जगह विकिपीडिया ने अपनी ओर आकर्षित किया। विकिपीडिया के पेजों पर घूमते हुए उन्हें 'संपादित करें' का वि​कल्प दिखा। यहां 'दिखा' से आप हैरान न हों, क्योंकि अनिरुद्ध ने मन की आंखों से ही 'वर्चुअल वल्र्ड' का भविष्य देख लिया था। विकिपीडिया पर 'संपादित करें' का विकल्प उन्हें एक हथियार के रूप में मिल गया। 

गाज़ियाबाद में रह रहे डॉ. अनिरुद्ध बताते हैं कि 2009 में हिंदी विकिपीडिया पर 25 हजार से कम पेज थे। उन्होंने जेएनयू में साइबर कैफे पर विकिपीडिया के हिंदी पेजों को संपादित करना शुरू किया। अनिरुद्ध कहते हैं कि प्रामाणिक हिंदी ज्ञान को लंबे समय तक सर्वसुलभ बनाए रखने में विकिपीडिया की भूमिका अहम है। इस प्लेटफॉर्म की उपयोगिता हर छात्र, शिक्षक को समझनी चाहिए। अनिरुद्ध 2009 से अब तक लगभग चार हजार हिंदी लेखों में योगदान कर चुके हैं। लगभग दो हजार विषयों (टॉपिक) को विकिपीडिया पर जोड़ा, जिनमें धीरे—धीरे दूसरे लोगों द्वारा तथ्य जोड़े जाते रहे। वह बताते हैं कि आज विकिपीडिया हिंदी के पेज हर महीने आठ करोड़ लोगों द्वारा देखे जाते हैं। अनिरुद्ध बताते हैं कि उन्होंने विकिपीडिया पर 'ग़ज़ल' पेज को संपादित करने से शुरुआत की थी। ग़ज़ल और उर्दू की अन्य विधाओं के बारे में उन्होंने पेज तैयार किए। 

विकिपीडिया पर ​अनिरुद्ध कुमार द्वारा संपादित पेज की हिस्ट्री


डॉ. अनिरुद्ध बताते हैं कि इन दिनों वह विकिसोर्स पर काम कर रहे हैं। हिंदी में साहित्य तथा अन्य विषयों की दुर्लभ पुस्तकों को विकिसोर्स पर उपलब्ध कराने में वह योगदान कर रहे हैं। विकिसोर्स पर उन्होंने दो वर्ष में करीब तीन हजार पेज तैयार किए हैं। अध्यापन कार्यों से जब भी वक्त मिलता है, वह अपने इस मिशन में लग जाते हैं। डॉ. अनिरुद्ध के कार्यों को देखते हुए विकिपीडिया ने उन्हें हिंदी पेजों के चुनिंदा एडमिन में जगह दी है। गौरतलब है कि अनिरुद्ध स्क्रीन रीडर के जरिये पढ़ते हैं और इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड में टाइपिंग करते हैं।

2 Comments

  1. डॉ अनिरुद्ध के जज्बे को सलाम।

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  2. डॉ अनिरुद्ध के हौसले को सलाम! साथ ही साथ प्रोलिंगो एडिटर्स को भी रोचक जानकारी देने के लिए ढेरों धन्यवाद!

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