
प्रोलिंगो न्यूज़: आपने उपेंद्र नाथ अश्क की एकांकी 'तौलिये' पढ़ी होगी। मध्यवर्गीय घरों में तौलिया अक्सर सफाई—गंदगी को लेकर जुबानी जंग का कारण बना रहता है। यह कहासुनी, तंज—व्यंग्य इस कदर चलता है कि हिंदी लेखक ने इस पर एकांकी लिख डाली। इस एकांकी के चरित्र मधु और वसंत आज भी हमारे आसपास मिलते हैं। नहाने के बाद बदन पोछना हो, भोजन ग्रहण करने से पहले हाथों को धुलकर पोछना हो तो तौलिया ही काम आता है। घर में जितने सदस्य उतने तौलिये। हमारे घरों में 'तौलिया' जितना काम आता है उतना शायद 'टॉवेल' या 'अंगोछा' नहीं। 'तौलिया' कितने काम का है, हम इसका अंदाजा लगा सकते हैं।
तौलिया शब्द हमारे लिए जितने काम का है उतनी ही रोचक है इसकी कहानी। भारत में तौलिया शब्द के प्रवेश को समझने के लिए हमें पांच सौ साल पीछे जाना पड़ेगा। वास्को—डि—गामा के नाम से हम परिचित हैं। इतिहास की पुस्तकों में बताया गया है कि वह 17 मई 1498 को भारत पहुंचा था। वह पुर्तगाल का था। यूरोप से भारत आने के लिए समुद्री मार्ग की तलाश का श्रेय वास्को—डि—गामा को ही जाता है। वास्को—डि—गामा के भारत आगमन की घटना के करीब छह साल बाद कोच्चि में पुर्तगाली शासन की शुरुआत हुई। आज के हिंदुस्तान का महत्वपूर्ण हिस्सा गोवा, दमन एवं दीव पर 450 वर्षों तक पुर्तगाल का शासन रहा। पुर्तगालियों गोवा, दमन एवं दीव के अलावा भी कई क्षेत्रों पर कब्जा किया लेकिन वह स्थायी नहीं रहा। 450 वर्षों के इस शासनकाल में ही भारतीय भाषाओं में ढेर सारे पुर्तगाली शब्दों का प्रवेश हुआ जिनमें से तौलिया भी एक है।
हिंदी प्रदेशों में अंगोछा, गमछा, अंगवस्त्रम जैसे शब्द पहले से हैं। पुर्तगाली शब्द 'तौलिया' अगर हिंदी तक आया तो इस बात की बहुत संभावना है कि पुर्तगाली अपने साथ शरीर पोछने के लिए जो वस्त्र लेकर आए उसकी बनावट अंगोछा, गमछा, अंगवस्त्रम से पूरी तरह अलग रही हो। हम आज भी तौलिये और अंगोछा, गमछा, अंगवस्त्रम में अंतर कर सकते हैं। शरीर, हाथों को पोछने में तौलिया लोगों को ज्यादा उपयोगी लगा। यही वजह है कि हिंदी प्रदेशों में तौलिया ने जगह बना ली।
पुस्तक शब्दों का सफर के लेखक अजित वडनेरकर अपने ब्लॉग में लिखते हैं, गमछा शब्द से कहीं ज्यादा शहरी परिवेश में अब टॉवेल या तौलिया शब्द का इस्तेमाल होता है। टॉवेल अंग्रेजी का शब्द है जबकि तौलिया हिंदी का प्रतीत होता है, मगर यह भी विदेशी शब्द है। ये दोनों ही शब्द एक ही परिवार के हैं मगर हिंदी में तौलिया अंग्रेजी से नहीं बल्कि पुर्तगाली से आया। टॉवेल और तौलिया जर्मनिक मूल के शब्द हैं। भाषाविज्ञानियो के मुताबिक प्राचीन जर्मनिक के थ्वाख्लिजॉ शब्द में वस्त्र का भाव था। इसका फ्रेंच में देशज रूप हुआ तोएल्ले, जिससे अंग्रेजी का towel बना। इसका स्पैनिश रूप तोल्ला, इतालवी रूप तोवेग्लिया और पुर्तगाली रूप बना तोआला toalha बना। पुर्तगालियों के भारत आगमन के साथ चौदहवी-पंद्रहवी सदी में भारत में इस शब्द का आगमन हुआ और हिंदी में यह तौलिया बन कर दाखिल हुआ।
हिंदी में पुर्तगाली से आए शब्दों की भरमार है। हमारे लिए इन शब्दों की पहचान करना मुश्किल है। हिंदी में रच—बस गए पुर्तगाली शब्दों के कुछ उदाहरण हैं — कनस्तर, बिस्कुट, गिरजाघर, पादरी, अचार, चाभी, संतरा, साबुन, पपीता, ऑलपिन, बाल्टी, गमला, बस्ता, मेज, बटन, कारतूस, तिजोरी, फीता, तंबाकू और कॉफी आदि। ये तो कुछ उदाहरण हैं। शब्दकोश लेकर बैठे तो ऐसे सैकड़ों शब्द हमें मिल जाएंगे जिनका उपयोग बोलचाल में खूब होता है।
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