प्रोलिंगो न्यूज : हम भारतवासी चाहे कोई भी भाषा बोलें लेकिन लिखते एक ही लिपि में हैं। अक्सर भाषा और लिपि को एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों ही एक—दूसरे से अलग हैं। भारत में सैकड़ों भाषाएं बोली, लिखी जाती हैं, लेकिन ज्यादातर भाषाएं एक ही लिपि में लिखी जाती हैं, और वह देवनागरी लिपि।
देवनागरी लिपि की उत्पत्ति प्राचीन भारत भूमि पर हुई। इसे नागरी और देवनागरी लिपि दोनों नामों से पुकारा जाता है। देव और नागरी शब्दों के आधार पर भाषा वैज्ञानिक इसकी उत्पत्ति के संबंध में अलग—अलग मत रखते हैं। कुछ देव से जुड़ा बताते हैं तो कुछ नागरिकों से संबंध स्थापित करते हैं। एक मत है कि देवनगर (काशी) में प्रचलन के कारण इसका नाम देवनागरी पड़ा। इस नाम की व्युत्पत्ति का कोई सर्वमान्य तथ्य नहीं है।
आधुनिक विश्व में जितनी भी लिपियां चलन में उनमें देवनागरी लिपि सबसे सशक्त मानी जाती है। इसमें कुल 46 अक्षर हैं, जिसमें 12 स्वर और 34 व्यंजन हैं। अक्षरों की क्रम व्यवस्था (विन्यास) भी बहुत ही वैज्ञानिक है। स्वर-व्यंजन, कोमल-कठोर, अल्पप्राण-महाप्राण, अनुनासिक्य-अन्तस्थ-उष्म इत्यादि वर्गीकरण भी वैज्ञानिक हैं। यह बायें से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान क्षैतिज रेखा से होती है जिसे 'शिरोरेखा' कहते हैं। यह देवनागरी की विशेष पहचान है।
देवनागरी में देश की अधिकतर भाषाएं लिखी जाती हैं। संस्कृत, पालि, हिन्दी, मराठी, कोंकणी, सिन्धी, कश्मीरी, हरियाणवी, बुंदेली भाषा, डोगरी, खस, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली भाषाएँ), तमांग भाषा, गढ़वाली, बोडो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, नागपुरी, मैथिली, संताली, राजस्थानी भाषा, बघेली आदि भाषाएँ और स्थानीय बोलियां भी देवनागरी में ही लिखी जाती हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएं भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। देवनागरी विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त लिपियों में से एक है।
बहुत अच्छी और महत्वपूर्ण जानकारी है। धन्यवाद।
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