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तमिल में लिखी पुस्तक पर साहित्य अकादमी पुरस्कार पा चुके हैं हिंदी से 'नाराज' होने वाले ये सांसद

लोकसभा की वेबसाइट पर सांसद एस. वेंकटेशन के बारे में दिए विवरण की तस्वीर

प्रोलिंगो न्यूज़ डेस्क : केंद्र को अंग्रेजी में लिखे पत्र का जवाब हिंदी में मिलने पर हाई कोर्ट पहुंचने वाले तमिलनाडु की मदुरै सीट से सांसद एस. वेंकटेशन राजनीतिज्ञ के साथ ही तमिल के एक प्रतिष्ठित लेखक हैं। एस. वेंकटेशन भाकपा (मा) की तमिलनाडु राज्य समिति के सदस्य हैं। 2008 में उनका पहला उपन्यास कवलकोट्टम प्रकाशित हुआ था। पाठकों के बीच यह बेहद चर्चित हुआ। इस उपन्यास को 2011 में तमिल भाषा का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके इस उपन्यास पर फिल्म भी बनी। एस. वेंकटेशन तमिलनाडु प्रोग्रेसिव राइटर्स एंड आर्टिस्ट एसोसिएशन के जनरल सेक्रेट्री भी हैं। 2019 के आम चुनाव में वह मदुरै सीट से 1.39 मतों से बढ़त के साथ चुनाव जीते और लोकसभा पहुंचे। 

अमेजन पर उपलब्ध साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त पुस्तक


क्या है हिंदी विरोध/अंग्रेजी प्रेम का मामला
मीडिया रिपोट्र्स में कहा गया है कि एस. वेंकटेशन ने सीआरपीएफ के ग्रुप बी और ग्रुप सी में 780 रिक्त पदों के लिए होने वाली लिखित परीक्षा के लिए पुडुचेरी में एक भी परीक्षा केंद्र बनाने की मांग की थी। इस मांग को लेकर उन्होंने अक्टूबर में गृह मंत्रालय को पत्र लिखा था। यह पत्र अंग्रेजी में लिखा गया था। गृह मंत्रालय की ओर से नवंबर में जवाब में पत्र मिला, लेकिन यह पत्र हिंदी में लिखा गया था। गृह मंत्रालय की ओर से हिंदी में जवाब मिलने पर वेंकटेशन ने विरोध दर्ज कराते हुए एक और पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि वह हिंदी भाषी राज्य के नहीं हैं और उन्हें हिंदी पढ़नी नहीं आती है। यह संविधान के तहत और ऑफिशियल लैंग्वेजेस एक्ट, 1963 के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन है। इसके बाद उन्होंने कोर्ट में अर्जी डालकर मांग की कि जिन अधिकारियों ने उन्हें हिंदी में जवाब दिया है, उनके खिलाफ एक्शन लिया जाना चाहिए। सांसद ने कहा कि मुझे इस पत्र का अंग्रेजी अनुवाद भी नहीं मुहैया कराया गया। 

कोर्ट ने क्या आदेश दिया
यह मामला मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच में था। अदालत में केंद्र सरकार ने कहा कि उनकी ओर से हिंदी में जवाब अनजाने में दिया गया था। ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया है। इस पर अदालत ने कहा कि केंद्र को उसी भाषा में जवाब देना चाहिए जिसमें राज्य सरकार आवेदन भेजे। हाईकोर्ट ने कहा, ‘एक बार अंग्रेजी में कोई बात कहने के बाद, यह केंद्र सरकार का कर्तव्य है कि वह केवल अंग्रेजी में जवाब दे।’ 

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