Need Certified Translation?

Embassy Approved | Apostille | Visa Documents

📞 Call ProLingo Now

हर्ष ने दो साल में 25 लोगों को कैथी लिपि में किया प्रशिक्षित, ऐप बनाने की तैयारी

लुप्त हो रही कैथी लिपि को बचाने में जुटे गिरिडीह के मूल निवासी युवा हर्ष


कभी
बिहार, उत्तर प्रदेश में राज लिपि का रुतबा रखने वाली कैथी लिपि धीरे—धीरे लुप्त हो रही है। इस लिपि को जानने वाले लोग कम ही बचे हैं। बिहार, झारखंड में जमीन के पुराने दस्तावेज कैथी लिपि में ही मिलते हैं। ऐसे में यह संकट गहराता जा रहा है कि कैथी के जानकार अगर नहीं बचे तो बड़ी संख्या में ये दस्तावेज हमेशा के लिए अपठनीय हो जाएंगे। कैथी लिपि के जो गिने—चुने जानकार हैं वे इस ज्ञान को या तो साझा नहीं करते या करते हैं तो अपने किसी खास सगे—संबंधी से। ऐसे में कैथी को जीवित रखने की नई उम्मीदों के साथ काम कर रहे हैं रांची के हर्ष कुमार सिन्हा। कैथी सीखने की चाहत रखने वालों के लिए हर्ष आनलाइन कक्षाएं चला रहे हैं।
 

रांची में एक निजी बैंक में हैं कार्यरत
रांची में एक निजी बैंक में कार्यरत हर्ष ने रांची विश्वविद्यालय से 2016 में बीएससीआई की पढ़ाई पूरी की। 2017 में उनका चयन बैंक में हो गया। हर्ष बताते हैं कि कैथी को लेकर उनके मन में काफी समय से योजना चल रही थी। 2019 में उन्होंने कैथी का आनलाइन प्रशिक्षण देना शुरू किया। बैंक के कामकाज के बाद समय निकालकर वह कैथी की आनलाइन कक्षा चलाते हैं। हर्ष कहते हैं कि इस ज्ञान को लोगों में बांटकर ही लुप्त हो रही इस लिपि को बचाया जा सकता है।

दो वर्ष में 25 लोगों को किया प्रशिक्षित 
हर्ष बताते हैं कि उन्होंने जब कैथी के प्रशिक्षण का फेसबुक पेज बनाया तो ढेर सारे लोगों ने उनसे यह लिपि सीखने के लिए संपर्क किया। व्यावसायिक कोचिंग की तरह कैथी की कक्षाएं चलाना समय की कमी के चलते मुश्किल था। इसलिए तय किया कि चुनिंदा लोगों को ही प्रशिक्षण देंगे। तकनीक के इस दौर में यह प्रशिक्षण आनलाइन देना ज्यादा सुविधाजनक लगा। इन दो वर्षों में वह करीब 25 लोगों को कैथी में प्रशिक्षित कर चुके हैं। 

नाना के सानिध्य में सीखी कैथी
कैथी आपने कहां से सीखी? हर्ष ने बताया कि इस लिपि का ज्ञान उन्हें अपने नाना से विरासत के रूप में मिला। उनके नाना झारखंड की एक रियासत में दीवान थे। उन्हें कैथी की अच्छी जानकारी थी, या कहें कि उनके दौर में सारा कामकाज कैथी लिपि में ही होता था। हर्ष ने बताया कि उनकी माध्यमिक शिक्षा ननिहाल में ही हुई। नाना कैथी लिपि को अपनी अगली पीढ़ी को सिखाना चाहते थे। किन्हीं वजहों से जब और लोगों ने रुचि नहीं ली तो उनके नाना ने हर्ष को कैथी का प्रशिक्षण दिया। हर्ष बताते हैं कि नाना जी कहते थे कि मेरे बाद कोई तो इस लिपि को जानने—समझने वाला हो। 

शिरोरेखा नहीं लगती, इसलिए वक्त कम लगता है
हर्ष बताते हैं कि कैथी और देवनागरी लिपि में वर्ण लगभग बराबर हैं। दोनों के लेखन में मूल अंतर कैथी में शिरोरेखा का न होना है। शायद यही कारण है कि कैथी लिखने में देवनागरी के मुकाबले वक्त कम लगता है। कैथी को सीखना और पढ़ना कठिन क्यों है? इस प्रश्न पर हर्ष कहते हैं कि कैथी सीखना कठिन नहीं है। यह लिपि है इसलिए लेखन का खूब अभ्यास करना होता है। इस अभ्यास से पढ़ना भी आ जाता है।  

कैथी—हिंदी लिप्यंतरण के लिए ऐप बनाने की तैयारी
हर्ष कहते हैं कि इस लिपि को बचाने के लिए इसे तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। उनकी योजना कैथी के यूनिकोड फॉन्ट विकसित करने की है। गूगल ट्रांसलेट की तर्ज पर वह एक ऐसा ऐप विकसित करना चाहते हैं जो कैथी से हिंदी में लिप्यंतरण मिनटों में कर दे। हर्ष कहते हैं कि इससे जमीन के दस्तावजों का कैथी से हिंदी में अनुवाद आसान हो सकेगा। कैथी—हिंदी ऐप बनाने को लेकर वह विशेषज्ञों से बातचीत कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही ऐप तैयार हो जाएगा। 

Previous Post Next Post
|
Prolingo Logo

Prolingo News

Professional Translation Services